An After Thought, Parenting & Relationships

Smriti Bioscope (स्मृति बायोस्कोप) – Marasim (मरासिम)

दिन के बारह बज रहे हैं और अभी तक खाना तैयार नहीं हुआ है। दो बजे ऑफिस की मीटिंग भी तोह है। ओह गॉड, आज तोह पक्का लेट होने वाली हूँ और बॉस का आँखों से तीर जैसे चुबने वाला भाव पक्का है।

अपने इन ख्यालों में मैं इतना मसरूफ थी कि मोबाइल पे बज रहे गानों पर ध्यान ही नहीं था। रोज़ यही तो करती थी मैं, सुबह बेटे को स्कूल कि padhai मे मदद करना फिर घर साफ करना और उसके बाद नहा कर खाना बनाने में जल्दी- जल्दी जुट जाना।

“क्या हालत हो गयी है इस लॉकडाउन में, आज तो बमुश्किल से नहा के जीन्स- टॉप पेहेन पाई hun मगर फिर भी समय से पीछे ही चल रही है अपनी गाड़ी ” मैं अपने आप से ही बोल पड़ी।

तभी जगजीत सिंह कि मेरे एक पसंदीदा गाने ने मुझे अपने मन के भीतर चल रहे अंतर्द्वंद से बहार खींच निकला।

“शाम से आँख मे नमी से है, आज फिर आप की कमी सी है<<<<<”

इस गाने में एक मनमोहक कशिश है जो सीधे दिल तक पहुँचती है। और वोह जज्बात, उफ्फ, यह एक गीत मन में कितनी उथल- पुथल मचाने की क्षमता रखता है। ना चाहते हुए भी मन के अंदर यादों कि किताब का एक दबा हुआ पन्ना खुल के ज़ेहन में आ गया।

मैं जानती थी की यह समय नहीं था इन सब बातों को लेके क बैठने का, पर दिल और दिमाग में यह वाकया और वह किरदार आज भी इतना असर रखता था की मेरी शख्सियत उसके एहसास के तले हार ही जाती है।

बात उन दिनों की है जब मैंने अपनी आगे की padhai के लिए दूसरे शहर के कॉलेज में दाखिला लिया था। पहली बार घर से दूर हो के मैं, दुनिया की असली जद्दोजेहद में आ खड़ी हो गयी थी। नए लोग, नया शहर, नया जीने का तरीका। एक तरफ आज़ादी महसूस हो रही थी, तोह दूसरी तरफ थोड़ी घबराहट भी साथ थी।

कॉलेज के पहले दिन, सीनियर्स की नज़रों से बचने के लिए सीधा- सच्चा सलवार कमीज का joda पेहेन लिया था। आज भी याद है मुझे पीले रंग का सूट था वह। मैं पेइंग गेस्ट की तरह रह रही थी जो कॉलेज से 1.5-2 किलोमीटर ही दूर था मगर चल क आने के कारण में पहले दिन ही देरी से पहुंची थी।

नोटिस बोर्ड पर अपना नाम तलाश कर ही रही थी के पीछे से एक लड़का बोर्ड की तरफ भागते हुए आया। पता नहीं किस बात पे इतना उत्साहित था। वह मेरे खड़े होने की परवाह किये बगैर ही बोर्ड पे कुछ ढूढ़ने लगा। मैंने मन ही मन अंदाज़ा लगाया की शायद कॉलेज के इंडक्शन प्रोग्राम के अंतर्गत कुछ कार्य करवा रहे होंगे।

“एक्सक्यूज़ मी, वेयर इस इंडक्शन प्रोग्राम गोइंग ऑन?” मैंने उसी से पूछ लिया।

“यहाँ से सीढ़ियां उतर के सीधे हॉल में चले जाओ, उस तरफ”, उसने कहा। “बाय द वे, मेरा नाम अभिनव है, सेम क्लास!”

“हाय, मेरा नाम स्मृति है।” मैंने जवाब में कहा।

“नाइस नेम, चलो हॉल ही में चलते है।” यह कहते हुए वो हॉल की तरफ मुड़ गया।

आप कह सकते है की वह कॉलेज में मेरा पहला दोस्त बना था। पर पहले पहल तो हम सिर्फ हेलो- हाय वाले क्लासमेट ही थे, फिर एक दिन क्लास की सीढयों पे बैठे – बैठे एक क्लासमेट ने Orkut  के बारे में सभी को बताया। तुरंत ही सब लोगों ने अपने- अपने लैपटॉप से इस वेबसाइट पर अपना अकाउंट बना डाला। सोशल नेटवर्किंग का चलन बहुत नया था उन दिनों। और आज देखो तो लोग एक दूसरे से मिलकर या फ़ोन पर कितना कम बात करते हैं।

खैर उस दिन शाम को अपने रूम पहुंचने के बाद, मैंने अपना कॉलेज का ख़तम किया ही थे की Orkut पे एक नया फ्रेंड रिक्वेस्ट दिखाई दिआ।

अभिनव का था। मैंने बिना किसी शक और शुवा के फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर ली।

ऐसे मैं और वो ऑफिशियली दोस्त बन गए। हा हा हा !

फिर वो दौर आया जब सभी दोस्त मिलकर खाने पे जाते, पास के शहर में घूमने जाते और कॉलेज के प्रोग्राम में खूब धूम मचाते। इन सब क बीच अभिनव कब ‘अभी’ बन गया मालूम ही नहीं पड़ा। वो होता है ना की दोस्तों की मंडली में करीबी दोस्त साफ़ होते जाते है। वैसा ही मेरे और अभी के साथ भी हुआ।

वक्त तेज़ी से बीत रहा था, और वो दिन भी आया जब सभी को समर इंटर्नशिप के लिए जाना था। कुछ लोगों को उसी शहर में मौका मिल गया पर बाकियों को अपने शहर लौटना पड़ा। अभिनव को भी अपने शहर जाना पड़ा। इसी दौरान हमे ये एहसास हुआ कि हम दोस्त से कुछ बड़ के ho गए थे।

अभी के लौटने के बाद सब कुछ बदल गया था। सब कुछ नया हो गया था। वो एहसास, साथ रहना, बातें करना और वो पहला तोफा जो वो मेरे लिए अपने शहर से लेके आया था। हाए ए ए !

प्यार के वो दिन भी कितने सुहाने होते है ना? आप सातवें आसमान पे होते हो। वो कसमें, वो वादे, सभी सच्चे लगते है। उस इंसान पे आप कितना विश्वास करने लगते है, अपना सब कुछ मानने लगते है। इतना ही नहीं आप अपनी ज़िन्दगी उनके बिना सोच भी नहीं पाते है।

वो पल एक सुहानी सांझ की तरह लगते है जिससे आप कभी नहीं ख़तम होने देना चाहते हैं पर>>>

पर नियति तो यह ही है कि शाम कितनी ही हसीन क्यों ना हो उससे ढलना तोह पड़ता है। कुछ रिश्तों कि नियति में भी शाम hi कि तरह ढलना तय होता है।

दूसरे साल, कॉलेज में हमारे से नीचे जूनियर बैच आ गए। हम सब दोस्तों का ध्यान भी पढ़ाई और नौकरी की कोशिश में लग गया। पर अभिनव का कहना इस बारे में कुछ अलग ही था। जब भी main उसे से नौकरी और प्लेसमेंट की तैयारी की बात करती तो झुंझला जाता और कहता –

“अरे तुम लोग कैसे हो पूरे समय बस इसी चीज़ की बात करते हो। मम्मी- पापा भी यहि कहते रहते है, शायद में ही इस दुनिया से अलग हूँ।” >>> और देखो तो क्या हुआ, जैसे ही वो नौकरी में लगा तो आज तक उसे कोई रोक नहीं पाया। अच्छा भी है।

मगर क्या विरोधाभास है ना, आज देखो तो वो पूरी क्लास में से सबसे कामयाब लोगों में से एक है। खुश हु मैं उसके लिए!

खेर, वो दिन भी आया जब मेरी नौकरी अपने शहर में लग गयी। इसके मतलब साफ़ था, मुझे जाना था।

मेरे जाने का दिन भी आ गया और फिर भी अभिनव मुझे ना जाने के लिए कहता रहा। परिवार का दबाव और अच्छे करियर बनाने की चाह मुझे अभिनव से दूर जाने से रोक नहीं पायी। आज भी वो दिन मेरी आखों के सामने एकदम ताज़ा है। अभिनव कथई रंग का जैकेट और जीन्स पहने हुए था अपनी बाइक के पास खड़ा था, जब बस चली थी तो मैंने पलट – पलट कर उसे देखा था। वो रुआंसा गया था। मन के अंदर ऐसा लग रहा था की मेरा कुछ हिस्सा इस शहर में ही छूट रहा था magar जाना तो था।

उस वक्त मुझे मानो पूरा विश्वास था की कुछ महीनों या साल भर की दूरी हमारे रिश्ते को खराब नहीं कर पायेगी। शादी क्या होती है तब मैं नहीं समझती थी अच्छे से, पर मन ही मन में इस शब्द को मैं अभिनव से जोड़ कर देखती थी।

मेरी नौकरी अपने शहर में शुरू हुई और वो भी अपने काम में व्यस्त होता चला गया। मैं अपने मम्मी-पापा के साथ रहती थी तो अभिनव और मेरे बीच बातें भी इतनी नहीं हो पाती थी। इसी तरह कुछ महीने बीत गए। एक दिन ऑफिस से लौटने के बाद शाम की चाय का प्याला मेरे हाथ में देते हुए मम्मी ने शादी की बात मेरे सामने छेड़ दी।

जब यह बात मैंने रात को अभिनव से फ़ोन पे बताई तो उसका जवाब बड़ा ठंडा सा था। एक लड़की की चिंता काश लड़के समझ पाते! काश!

शादी की बात पे उसका जवाब साफ़ था। “थोड़े साल नौकरी कर लूँ फिर ही शादी करूँगा”, उसने कहा था मुझसे।

ये दूरियां कितनी शंकाये साथ लाती है। मैं सोच में पड़ गयी कहीं अभिनव मुझे धोखा तो नहीं देगा? क्या उसके लिए रुकना सही रहेगा? क्या मुझे उसकी बात समझ कर उसे वक्त देना चहिये? क्या वो मुझसे सच में शादी करना चाहता है भी या नहीं? क्या वो मुझे सही में इतना प्यार करता है भी या नहीं? क्या मुझमें वो उसका जीवनसाथी नहीं देखता?

इतने सारे सवाल जिनसे मुझे अकेले ही झूझना था। महत्वपूर्ण यह था की मेरा विश्वासअभिनव के ऊपर से उसके ठन्डे जवाब के बाद डगमगा गया था। इसी बीच मेरी शादी तय करदी गयी। मम्मी- पापा ने मुझसे पूछा भी था की अगर मुझे कोई लड़का पसंद हो तो मैं बताऊँ। मगर मैं बताती भी तो क्या, क्युकी अभिनव ने humare रिश्ते की बात अपने परिवार वालों से करने से भी मन कर दिया था।

मैंने मम्मी- पापा द्वारा लाये हुए रिश्ते क लिए हामी भर दी और कुछ दिन बाद मेरी शादी भी हो गयी।

मगर आज भी कुछ सवाल हाथ में चुभी फांस की तरह मुझे चुभते है। क्या सच में वो मुझसे प्यार करता था भी या नहीं? क्या अगर में उसके लिए रुक जाती तोह वो मुझसे शादी करता?

वो वक्त आज मानों जैसे कोई बीता हुआ समय नहीं बल्कि कोई दूसरा जन्म या फिर किसी दूसरी दुनिया में घटित हुआ वाक्या लगता है। और अभिनव मुझे एक टाइम-ट्रैवलर जैसा लगता है जो किसी और दौर से मेरे जीवन में आया कुछ अनमोल पल ले कर आया और फिर मुझे अपनी यादों के साथ छोड़ गया।

वैलेंटाइन’स डे नज़दीक होने के वजह से प्यार और विरह के गीत और ग़ज़लें, रेडियो पे खूब बजाये जा रहे थे। और मेहदी हसन की जब वो सुप्रसिद्ध ग़ज़ल – रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ>>” चलायी गयी तभी मेरी नज़र घड़ी से जा टकराईं, दोपहर के 1.30 बज चुके थे। खाना तोह मैंने इन यादों के फ्लैशबैक के साथ- साथ ही बना लिया था पर इस गीत की वो पंक्तियाँ एक ग़हरी टीस मन में छोड़ गयी,

“<<<< कुछ तो मेरे पिन्दार-ए-मोहब्बत का भरम रख
तू भी तो कभी मुझ को मनाने के लिये आ
रंजिश ही सही…

माना के मोहब्बत का छुपाना है मोहब्बत
चुपके से किसी रोज़ जताने के लिए आ
रंजिश ही सही.

पहले से मरासिम ना सही फिर भी कभी तो
रस्म-ओ-रहे दुनिया ही निभाने के लिये आ
रंजिश ही सही…

किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम
तू मुझ से खफा है तो ज़माने के लिये आ
रंजिश ही सही...>>> “


Read the first story in Smriti Bioscope group collection here Ghar.

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P.S. This is a Hindi fiction short story. Any resemblance to any person living or dead should be thought to be purely a coincidence. Image for creative depiction only. Image Source: BollySpice.com

This post is written for #StorytellersBlogHop FEB 2021 by Ujjwal (https://mywordsmywisdom.com/) & MeenalSonal ( https://www.auraofthoughts.com/ ).

(21) Comments

  1. Alpana Deo says:

    कभी कभी बीती यादें इतनी पक्की होती हैं की हमें पत आही नहीं चलता है सुर वो हमारी यदूँ का एक अहम हिस्सा बन जाती हैं। कॉलेज कि दिनों की बात ही कुछ और होती हैं। वो दिन भुलाए नहीं भूलते।

  2. Beautiful, intense story of Abhinav and Smriti, feels like everything just happened to the next door may be in college or in colony, but definitely a love story that left behind with so many questions unanswered!!! Very Well written.

  3. Romila says:

    After a long I read Something different in Hindi again. You have great story writing skills and when you ended the story with my favourite Ranjish hi sahi, the complete feel got changed. Thank you for writing this piece and making my Sunday read’s interesting

  4. वाह! वेलेंटाइन डे पर एक प्रेम कहानी पढ़ कर अच्छा लगा। ऐसे कई लम्हे आते हैं ज़िन्दगी में जब वह हसीन मोड़ नजर आता है पर किसी की मंज़िल कहां है, कोई नहीं जानता!

    1. Nice story of a young girl and yes you have brought her memories in a very nice way, new city, new college, new life and a sort of freedom well-written story.

  5. Such a simple yet poignant tale. Something i related to a lot. As we grow so many relations are left so many new ones formed. Some questions remain unanswered. Loved it totally
    Deepika Sharma

  6. After a long time I have read such a touching story in Hindi. Vo college ka pehla pyar aur uski yaaden. Great work.

  7. Orkut… thoes were the days when SM and online shopping were not very common. Nice story.
    Nice to have you on the Blog hop.

  8. Dr. Surbhi Prapanna says:

    Loved the way you had narrated the whole scene. I had felt I had seen a romantic movie with two amazing love birds, Abhinav and smriti. yes, old memories brings back so many beautiful past incidences and this story has done the same with most beautiful way.

  9. Touching story with details.
    How time has gone by, but the feelings haven’t changed. She even remembers the colour of his clothes!
    Abhinav appeared like a time-traveller to her.
    Valid questions of Smriti- would he have married her a few years down the line?
    Meaningful lyrics.

  10. बड़ी ही प्यारी सी स्टोरी, हम सब ने कही ना कही ऐसी कहानियाँ अपने आस पास देखी है और ख़ुद भी जी है।।हाए वो orkut का ज़माना अब तो इतना कुछ आ गया है की लोग मिलकर बात करना मानो भूल ही गए है ।

  11. Maybe Abhinav was a time traveller else she would have found him on current social media. The story line and the way you conveyed emotions in it are brilliant.

  12. Beautiful and realistic. Smriti and Abhinav’s unspoken words said so much. Some small things can trigger our memory and take us down the memory lane.

  13. Prerna Wahi says:

    Such a beautiful story full of love. I thoroughly enjoyed your narration!

  14. कितनी सुन्दर कहानी गढ़ी है आपने, प्रेम, विरह और कॉलेज रोमांस से ओत प्रोत। पढ़ के जवान दिल के
    किस्से ताज़ा तरीन हो गए। सच में पहला प्यार भुलाये नहीं भूलता , चाहे समय की कितनी ही धूल जमी हो उसपर, एक छोटा क्षीण लम्हा भी उसको गेहराई तक उकेर देता है। और साथ ही हमारे अंदर के दबे एहसासों को हवा देता है।

  15. Very intense storry between Smriti and Abhinav. Loved your narration style.

  16. bahut hi sundar likha hai, such a beautiful story

  17. Orkut seems so long gone and now forgotten. Loved your narrative and the romantic tale of Abhinav and Smriti. Very well written.

  18. Shamik says:

    Beautiful narration of the story. I liked the way you narrated the complete story. Thanks for sharing this.

  19. A lovely write up which is very realatable and I loved the way it was described . So many questions that never get answered and yet life moves on … Lovely take on the prompt !

  20. There are so many love stories that don’t lead to marriage yet have fond memories attached to them. Better than concentrating on our today than dwelling on the what ifs. This was beautifully written, you should write in Hindi more.

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